बॉलीवुड की दुनिया में ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम ग्लैमर, टैलेंट और ग्रेस का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपने शानदार करियर में कई यादगार फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। लेकिन हर कलाकार की तरह उनके करियर में भी कुछ ऐसे पल आए जब बड़ी उम्मीदों के बावजूद फिल्में फ्लॉप रहीं। ऐसी ही एक फिल्म है उमराव जान (2006), जिसे ऐश्वर्या की सबसे बड़ी असफल फिल्मों में गिना जाता है।
जेपी दत्ता की फिल्म ‘उमराव जान’: बड़ी उम्मीदों के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप क्यों हुई?
‘उमराव जान’ का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर जेपी दत्ता ने किया था। फिल्म मिर्जा हादी रुशवा के प्रसिद्ध उर्दू उपन्यास ‘उमराव जान अदा’ पर आधारित थी। उस समय लगभग 15 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म एक भव्य प्रोजेक्ट मानी गई थी। इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ अभिषेक बच्चन, शबाना आज़मी, सुनील शेट्टी और हिमेश रेशमिया जैसे नाम जुड़े थे। फिल्म की कहानी एक तवायफ उमराव जान की जिंदगी, उसकी मोहब्बत और दर्द के इर्द-गिर्द घूमती है।
ऐश्वर्या की खूबसूरती, लेकिन किरदार में आत्मा की कमी
फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती थी 1981 में आई रेखा की क्लासिक फिल्म ‘उमराव जान’ से तुलना। रेखा के प्रदर्शन को आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है। जब ऐश्वर्या ने वही किरदार निभाया, तो दर्शकों की उम्मीदें आसमान पर थीं। हालांकि, ऐश्वर्या ने अपने लुक, पोशाक और एक्सप्रेशन से प्रभावित किया, लेकिन दर्शकों को किरदार की भावनात्मक गहराई महसूस नहीं हुई। समीक्षकों ने माना कि ऐश्वर्या खूबसूरत दिखीं, मगर किरदार में “आत्मा” नहीं झलक पाई।
शानदार संगीत, लेकिन कमजोर निकली इस इस फिल्म की कहानी
फिल्म का संगीत अनु मलिक ने तैयार किया था और अलका याज्ञनिक की मधुर आवाज़ ने गीतों को यादगार बना दिया। ‘सलाम’, ‘इन्हें क्या हुआ’ और ‘मेरे दिल को पता’ जैसे गाने खूब चले। बावजूद इसके, फिल्म की कहानी, लंबाई और धीमी गति ने दर्शकों को बांधे नहीं रखा। समीक्षकों ने इसे विजुअली खूबसूरत लेकिन इमोशनली कमजोर बताया।
बॉक्स ऑफिस पर नाकामी
जहां फिल्म से उम्मीद थी कि यह बड़े स्तर पर कमाई करेगी, वहीं परिणाम इसके विपरीत रहा। करीब 15 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने मुश्किल से 7 करोड़ की कमाई की। बड़े स्टारकास्ट और शानदार सेट्स के बावजूद यह फिल्म ऐश्वर्या राय बच्चन के करियर की सबसे बड़ी फ्लॉप में गिनी जाती है।
निष्कर्ष
‘उमराव जान’ (2006) एक ऐसी फिल्म थी जिसमें भव्यता, स्टार पॉवर और संगीत सब कुछ था, लेकिन दर्शकों से जुड़ाव की कमी ने इसे असफल बना दिया। यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि केवल चमक-दमक और प्रसिद्ध चेहरों से फिल्में नहीं चलतीं, बल्कि दर्शकों के दिलों को छूने वाली कहानी और भावनाएं ही किसी फिल्म को यादगार बनाती हैं।
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